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Bipin Rawat Death News

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Bipin Rawat बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर में विमान दुर्घटना में मौत का शिकार हुए सीडीएस बिपिन रावत केवल कर्म से ही नहीं, मन से भी पूरी तरह फौजी थे। वे कभी निश्चिंत बैठना नहीं चाहते थे, न ही दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में पोस्टिंग लेकर आराम की जिंदगी चाहते थे। हर समय उनकी इच्छा यही होती थी कि वे देश के सैनिकों के साथ, उनके बीच में रहें। यह जानकारी जनरल बिपिन रावत के साले यशवर्धन सिंह ने दी।

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जनरल रावत और उनकी पत्नी मधुलिका सिंह की मौत की पुष्टि के थोड़ी देर बाद नवभारतटाइम्स डॉट कॉम से बात करते हुए यशवर्धन सिंह ने देश के इस जांबाज सैनिक के बारे में कई ऐसी बातें साझा की, जिनके बारे में लोग कम ही जानते हैं। यशवर्धन सिंह ने बताया कि जनरल रावत हमेशा कहते थे कि उन्हें महानगरों में पोस्टिंग नहीं चाहिए। वे फौजी हैं और हर समय देश के बॉर्डर पर सैनिकों के साथ रहना चाहते हैं।

शुरुआत में इसलिए परिवार से रहे दूर
जनरल रावत की 1986 में शादी हुई थी। तब वे सेना में कैप्टन के पद पर थे। शादी के बाद शुरुआती दिनों में उनकी पोस्टिंग सीमा पर थी। इस दौरान वे परिवार को अपने साथ नहीं रखते थे। उस समय उनकी दोनों बेटियां छोटी थीं। जनरल रावत को लगता था कि परिवार को साथ रखने से एक सैनिक के रूप में जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल होगा। इसलिए शुरुआती दिनों में बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी मधुलिका ने अकेले पूरी की।ससुराल को गिफ्ट देने का वादा रहा अधूरा
यशवर्धन सिंह ने जनरल रावत और अपनी बहन मधुलिका से अंतिम मुलाकात के बारे में भी बताया। दशहरे से ठीक पहले दिल्ली में यह मुलाकात जनरल रावत के घर पर हुई थी। इस दौरान काफी देर तक बातचीत हुई। जनरल रावत ने वादा किया था कि वे 2022 की जनवरी में शहडोल आएंगे। उन्हें अपने ससुराल को गिफ्ट के रूप में सैनिक स्कूल की शुरुआत करने का भी वादा किया था, लेकिन इसे पूरा करने से पहले ही मौत हो गई।

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1978 में सेना में हुए भर्ती
जनरल रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को हुआ था। दिसंबर 1978 में सेना की 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियन में कमीशन ऑफिसर बने। वे 31 दिसंबर 2016 से थलसेना प्रमुख भी रहे। उन्हें पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा, कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर में कामकाज का अनुभव रहा। सीडीएस बनाए जाने से पहले बिपिन रावत 27वें थल सेनाध्यक्ष थे। आर्मी चीफ बनाए जाने से पहले उन्हें 1 सितंबर 2016 को भारतीय सेना का उप सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था।

पिता की यूनिट में मिला कमीशन
जनरल रावत के परिवार में हमेशा से देश सेवा की परंपरा रही है। जनरल रावत के पिता भी आर्मी ऑफिसर थे और बतौर लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर हुए। दिसंबर 1978 में बिपिन रावत उसी गोरखा राइफल्स में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशंड हुए जो कभी उनके पिता की यूनिट हुआ करती थी। बतौर लेफ्टिनेंट उनका सफर शुरू हुआ और इस सफर में वह आर्मी चीफ के पद और अब सीडीएस के पद तक पहुंचे।

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बिपिन रावत

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