Mass resignations of JD pour in as protest continues in MP

Mass resignations of JD pour in as protest continues in MP

COVID-19 Crisis कोरोना संक्रमण के कम होने के बाद अब मध्यप्रदेश Madhya Pradesh के जूनियर डॉक्टरों junior doctors ने छह सूत्रीय मांग रखते हुए मोर्चा खोल दिया हैं। गुरुवार को जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध पांच मेडिकल कॉलेजों में पीजी के फाइनल ईयर के 468 स्टूडेंट्स के नामांकन कैंसिल कर दिए गए हैं।

इनमें GMC भोपाल के 95, MGM इंदौर के 92, गजराजा कॉलेज ग्वालियर के 71, नेताजी सुभाषचंद्र बोस कॉलेज जबलपुर के 37 और श्यामशाह कॉलेज, रीवा के 173 स्टूडेंट्स शामिल हैं। इधर, कार्रवाई के विरोध में गुरुवार शाम प्रदेश के करीब 2500 जूडा ने अपना इस्तीफा डीन को सौंप दिया है। इनमें इंदौर के 476 और जबलपुर के 350 छात्र शामिल हैं। इंदौर के 476 जूनियर डॉक्टरों ने अपना सामूहिक इस्तीफा मेडिकल कॉलेज के डीन संजय दीक्षित को सौंप दिया।

आपको बता दे कि इधर मध्यप्रदेश सरकार ने सी.पी.आई. के अनुसार जूनियर डॉक्टर्स के स्टायपेंड में 17 प्रतिशत की वृद्धि मान्य की गयी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग जल्द ही इसके आदेश जारी करने वाला हैं। प्राइस इंडेक्स के तहत इसमें आगे भी बढ़ोत्तरी की जायेगी। स्टायपेंड के अतिरिक्त इनके लिए चिकित्सा छात्र बीमा योजना लागू की जा रही है।

COVID-19

ये छह सूत्रीय मांग है जूडा की

  1. स्टाइपेंड में 24 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करके 55 हजार से बढ़ाकर 68 हजार 200, 57 हजार से बढ़ाकर 70 हजार 680 और 59 हजार से बढ़ाकर 73 हजार 160 रुपए कर दी जाए।
  2. हर साल वार्षिक 6% की बढ़ोत्तरी भी हमारे स्टाइपेंड पर दी जाए।
  3. पीजी करने के बाद एक साल के ग्रामीण बांड को कोविड की ड्यूटी के बदले हटाने के लिए एक कमेटी बनाई जाए, जो इस पर विचार करके अपना फैसला जल्द से जल्द सुनाए।
  4. कोविड ड्यूटी में काम करने वाले हर जूनियर डॉक्टर को 10 नंबर का एक गजटेड सर्टिफिकेट मिले, जो आगे उसको सरकारी नौकरी में फायदा प्रदान करे।
  5. कोविड ड्यूटी करने वाले सभी जूडा के परिवार के लिए अस्पताल में अलग से एक एरिया और बेड रिजर्व जाए। इलाज में प्राथमिकता के साथ सभी सुविधाएं फ्री ऑफ काॅस्ट मुहैया कराया जाए।
  6. कोविड ड्यूटी में कार्यरत जूनियर डॉक्टर के अधिक कार्यभार को देखते हुए उन्हें उचित सुविधा प्रदान की जाए।

सी.पी.आई. के अनुसार जूनियर डॉक्टर्स के स्टायपेंड में 17 प्रतिशत की वृद्धि मान्य की गयी है। जल्द ही इसके आदेश जारी हो जायेंगे। अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विछिन्नता अधिनियम-1979 आवश्यकतानुसार अनेक सेवाओं से जुड़े अधिकारियों/कर्मचारियों पर भी लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टर्स से अपेक्षा है कि वे मरीजों का उपचार जारी रखें। यह उनका नैतिक दायित्व भी है।
निशांत वरवड़े,आयुक्त चिकित्सा शिक्षा

डॉक्टर्स अपनी इच्छानुसार पी.जी. करने के लिए मेडिकल कॉलेज का चयन करते हैं। मेडिकल कॉलेज का चयन करते समय उन्हें मालूम रहता है कि उन्हें कितना स्टायपेंड मिलेगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को पी.जी. के दौरान प्रेक्टिकल के लिए भी मरीजों का उपचार करना जरूरी है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी में सेवाभाव से डॉक्टरों को जल्द काम पर वापस आना चाहिए।
डॉ. उल्का श्रीवास्तव,संचालक चिकित्सा शिक्षा

सरकार एक तरफ बात करने का नाटक कर रही है, दूसरी ओर उनके परिजनों पर बेवजह का दबाव बनाया जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद हम लगातार बैठक कर रहे हैं। बैठक में हम तय करेंगे कि आगे किस तरह से हम अपनी बात रखें।

डॉक्टर पंकज सिंह, जबलपुर जूनियर डॉक्टर एसाेसिएशन अध्यक्ष

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