fbpx

MP सिविल जज-2019 की परीक्षा में 980 और छात्रों को मिला मौका। 25 व 26 सितंबर को होगी परीक्षा।

एमपी हाईकोर्ट द्वारा आयोजित कराई गई सिविल जज-2019 के दूसरे चरण की परीक्षा में 980 और आवेदकों को मौका दिया गया है। इससे पहले 251 छात्रों को मेरिट लिस्ट में शामिल किया गया था। दरअसल सिविल जज की परीक्षा में 4 गलत सवालों और दो डिलिट कर दिए गए प्रश्नों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान पल्लव मोंगिया बनाम दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का रिफरेंस दिया गया था।

मध्य प्रदेश सिविल जज परीक्षा-2019 की परीक्षा 20 मार्च 2021 को हुई थी। परिणाम 24 मई 2021 को आया था। प्रारंभिक परीक्षा की अपलोड उत्तर कुंजी में 4 के उत्तर गलत थे, तो 2 सही जवाबों को डिलीट कर दिया गया था। 150 अंकों की इस परीक्षा में कट ऑफ मार्क्स के आधार पर मेरिट लिस्ट में 68 आवेदक नहीं आ सके। इस मामले को हाईकोर्ट में आवेदक अंकित ने 08 जून को याचिका के माध्यम से चुनौती दी। अंकित के साथ ही 68 लिस्ट मैटर को कनेक्ट कर दिया गया। बाद में 16 और रिट याचिकाओं को भी इससे कनेक्ट करते हुए एक साथ हाईकोर्ट में सुनवाई शुनरू की।

14 जुलाई को हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जजों की बनाई थी समिति

अंकित वर्सेज मप्र हाईकोर्ट के इस याचिका की पैरवी छात्रों की ओर से अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने की। उन्होंने सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए पूर्व के रेफरेंस और तर्कपूर्ण तथ्य रखे। इस पर एमपी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और विजय धगट की डिवीजन बेंच ने 14 जुलाई को छात्रों को राहत देते हुए हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जस्टिस के.के. त्रिवेदी और सी.वी. सिरपुरकरी की एक कमेटी बनाई थे। दोनों पूर्व जजों की कमेटी ने जांच में छात्रों के दावों को सही पाया।

पहले 251 छात्रों को मिली राहत

कमेटी के निर्णय और पुनर्मूल्यांकन के बाद कट ऑफ लिस्ट से वंचित रह गए 251 छात्रों को शामिल किया गया। हाईकोर्ट पूर्व की कट ऑफ लिस्ट में आ चुके छात्रों को दूसरे चरण की परीक्षा में शामिल होने का आदेश पहले ही दे चुकी थी। सिविल जज की परीक्षा कराने वाली समिति ने एक त्रुटि कर दी। दरअसल जो रि-वैल्युएशन के बाद जो लिस्ट तैयार की। उसमें पुराने और नए की कट आफ मार्क्स में अंतर कर दिया।

समित ने कट ऑफ मार्क्स पुराना ही रखा। जबकि पहली लिस्ट में सफल 1942 आवेदकों में सबसे न्यूनतम अंक तय कट आफ से नीचे चला गया था। सामान्य आवेदकों के लिए कट आफ 115 अंक तय किया गया था। पर रि-वैल्युएशन के बाद पहली सूची में शामिल न्यूनतम अंक पाने वाले आवेदक के अंक घटकर 111 रह गए।

दो बार रिव्यु याचिका की सुनवाई के बाद 980 और छात्रों को मिला मौका

अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने रिव्यु याचिका लगाकर इस त्रुटि को सुधारने की बात कही। कोर्ट में परीक्षा कराने वाली समिति ने इसे माना और कट आफ के अंक घटाकर नए सिरे से सूची तैयार की। पर इस बार भी एक त्रुटि और रह गई। रि-वैल्युएशन के बाद पहली सूची में शामिल एसटी के आवेदकों के अंक न्यूनतम क्वालीफाई के लिए निर्धारित अंक 82 से घटकर 78 हो गए। रिव्यु याचिका की ओर से फिर इस बिंदु को उठाया गया।जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने न्यूनतम क्वालीफाई शब्द को ही इस प्रकरण से हटा दिया। इसका फायदा 980 और आवेदकों को मिला। अब ये भी दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अब दूसरे चरण की मुख्य लिखित परीक्षा में कुल 251 पदों के लिए 3177 अभ्यर्थियों बैठ सकेंगे। ये परीक्षा 25 व 26 सितंबर को कराने का निर्णय लिया गया है।

तीसरी बार घोषित हुई परीक्षा की नई तारीख

हाईकोर्ट ने तीसरी बार परीक्षा की नई तारीख घोषित की है। सभी आवेदकों को दूसरे चरण की मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए अपने आवेदन पत्र 14 सितंबर की शाम 5.00 बजे तक खुद या डाक के माध्यम से परीक्षा कक्ष प्रशासनिक भवन मप्र के उच्च न्यायालय जबलपुर में जमा करना होगा। पहले के सफल आवेदक जो दूसरे चरण के लिए आवेदन नहीं भर पाए थे, उन्हें भी छूट दी गई है। 980 सफल अभ्यर्थियों के लिए जबलपुर शहर में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *