सेमीकंडक्टर में भी आत्मनिर्भर बनेगा भारत

केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर की कमी से निपटने के लिए 76 हजार करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की

अभी सेमीकंडक्टर के लिए हम चीन, ताइवान, कोरिया जैसे देशों पर निर्भर हैं।

ऐसे में सरकार के इस कदम से ये पूरी कहानी बदल सकती है। 

देश में सेमीकंडक्टर के प्रोडक्शन के क्या-क्या फायदे होंगे।

 सरकार के इस फैसला का चीन पर क्या असर होगा? आइए इस जानते हैं...

सेमीकंडक्टर को देश में तैयार करने की जरूरत क्यों?

ये बात किसी से छिपी नहीं है कि सेमीकंडक्टर की कमी से ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। 

कई कंपनियों को लंबे समय तक प्रोडक्शन बंद करना पड़ा, तो कई कंपनियों के प्लांट तक बंद हो गए। 

कोविड-19 महामारी से शुरू हुई चिप की कमी देखते ही देखते दुनियाभर की कंपनियों के लिए सिरदर्द बन गई।

कार के साथ वो प्रोडक्ट्स जिनमें चिप का इस्तेमाल किया जाता है, उनकी डिलीवरी समय पर नहीं मिल पा रही है। 

वैक्सीनेशन के बाद महामारी पर कंट्रोल तो आ गया, लेकिन चिप की कमी जस की तस है। 

हमारे यहां सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन से क्या फायदा होगा?

सेमीकंडक्टर का पूरा इको सिस्टम भारत में तैयार किया जाएगा। इस काम के लिए सरकार 6 साल तक निवेश करेगी। 

यानी जिन प्रोडक्ट्स में चिप का इस्तेमाल किया जा रहा है उनके प्रोडक्शन में तेजी आएगी। साथ ही इन प्रोडक्ट्स का वेटिंग पीरियड भी खत्म होगा।

अभी सेमीकंडक्टर के लिए हम 100% दूसरे देशों पर निर्भर हैं। चीन, ताइवान, कोरिया जैसे देश हमें सेमीकंडक्टर की सप्लाई करते हैं। 

यानी इनकी तरफ से सेमीकंडक्टर की सप्लाई में होने वाली देरी का असर हमारे यहां की कंपनियों पर पड़ता है।

सरकार का कहना है कि इसके सेटअप से देश में 1.35 लाख रोजगार भी पैदा होंगे। यानी लोगों को इस इंडस्ट्री से जुड़े अलग-अलग सेक्टर में रोजगार भी मिलेगा। देश में 85 हजार सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार किए जाएंगे।

कब खत्म होगा इंतजार?

सेमीकंडक्टर की कमी का असर सभी कार कंपनियों पर हुआ है। 

कब खत्म होगा इंतजार?

देश की सबसे बड़ी कार मैन्युफैक्चर कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के 2.5 लाख ग्राहकों को कार डिलीवरी का इंतजार है।

कब खत्म होगा इंतजार?

हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के 1-1 लाख ग्राहकों को डिलीवरी का इंतजार है।