
उज्जैन। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विक्रमादित्य, उनके युग, भारत उत्कर्ष, नवजागरण और भारत विद्या पर एकाग्र विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत विक्रम नाट्य समारोह के पाँचवें दिन कुलविंदर बख्शीश द्वारा निर्देशित महादेव का मंचन हुआ। इसके पहले इसके पहले महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी, वरिष्ठ पुराविद डॉ.आर.सी. ठाकुर एवं विक्रमोत्सव आयोजन समिति के सदस्य नरेश शर्मा ने कलाकारों का स्वागत किया।
महादेव प्रसिद्ध लेखक दुष्यंत कुमार के हिंदी नाटक एक कंठ विषपाई का नाट्य रूपांतरण है। दिलचस्प बात यह है कि यह उनके साहित्यिक जीवन का एकमात्र नाटक है। जटिलता के साथ डिज़ाइन किया गया यह नाटक छह महिला अभिनेताओं द्वारा कई पात्रों के चित्रण के माध्यम से अपने सार को दर्शाता है। इस प्रस्तुति में मयूरभंज चौ, मणिपुर मार्शल आर्ट, थांग-ता और कलारीपयट्टू की प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट जैसी स्वदेशी लोक कलाओं का समावेश है।
नाटक में भगवान शिव की घबराहट को एक देवता के रूप में दर्शाया गया है, जो अपने सभी रूपों में आम आदमी का प्रतिनिधित्व करते हैं। समुद्र मंथन के बाद, शिव ने दुनिया को बचाने के लिए जहर पी लिया और इस प्रकार उन्हें नीलकंठ कहा गया, जिसकी गर्दन नीली है। तब से, शिव भगवान शिव के लिए दंश झेल रहे हैं। समाज में नफरत, हिंसा, द्वेष, विश्वासघात… सभी तरह के जहर को उन्होंने मुस्कुराहट के साथ गले लगाया। फिर भी, शांतचित्त देवता, जिन्हें विध्वंसक माना जाता है, अपने क्रोध के कारण भयभीत हैं। उनका क्रोध इस पूरे ब्रह्मांड के अस्तित्व को नष्ट कर सकता है, फिर भी उनसे बिना किसी प्रतिरोध के जहर पीने की उम्मीद की जाती है। वह ऐसा करते हैं और अपनी नीली गर्दन के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा एक आम आदमी हर दिन, हर मिनट करता है।

मंच पर
विनीता जोशी, संजना देशमुख, चांदनी श्रीवास्तव, कोमल श्याम ठाकुर, माया शर्मा व अपूर्वा मोहिनी पंडित।
मंच परे
लाइट – चेतन धावले, म्यूजिक ऑपरेटर – भूषण भावसार, प्रोडक्शन – मुमताज अली, डिजाइन और डायरेक्शन- कुलविंदर बख्शीश, निर्माता – सुशील कुमार श्रीवास्तव, संपत सिंह राठौर।
आज की प्रस्तुति वराहमिहिर
समारोह के छठवें दिन 26 मार्च 2025 को सायं 07:00 बजे कालिदास अकादमी के बहिरंग मंच पर मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल द्वारा तैयार किया गया वराहमिहिर का मंचन होगा। इस नाट्य प्रस्तुति को निर्देशक लोकेन्द्र त्रिवेदी ने निर्देशित किया है। इसी क्रम में 27 मार्च को त्रिवेंद्रम की संस्था द्वारा कर्णभार का मंचन होगा जिसका निर्देशन नारायणी पणिक्कनर द्वारा किया गया है। 28 मार्च को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली द्वारा तैयार किया नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम् की प्रस्तुति होगी। जिसका निर्देशन राजेश सिंह द्वारा किया गया है। समारोह के अंतिम दिन मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय द्वारा तैयार किया गया नाटक मृच्छकटिकम् का मंचन होगा। जिसका निर्देशन मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के निदेशक टीकम जोशी द्वारा किया गया है।
